Skip to Content

              

              तीर्थधाम-ज्ञानोदय

             


 तीर्थधाम ज्ञानोदय का परिचय -

ज्ञानोदय तीर्थधाम का मुख्य जिनालय मध्य प्रदेश का सबसे विशाल लाल पत्थर से निर्मित मंदिर है। इसकी तीन स्थापत्य संरचना, आध्यात्मिक शांति और वास्तुकला का अद्भुत संगम है:


1. भूतल (भूतल) - 'स्वाध्याय एवं साधना केंद्र'

प्रमुख आकर्षण : यहां भव्य 'आचार्य श्री कुंदकुंद स्वाध्याय भवन' निर्मित है। यहां निरंतर जिनवाणी का स्वाध्याय होता है। पूज्य गुरुदेव श्री कांजी स्वामी के सीडी प्रवचन, विद्वानों की गोष्ठियाँ और नियमित धार्मिक संचालन किया जाता है। यह धार्मिक संप्रदाय के लिए तत्व-चिंतन का मुख्य केंद्र है।

2. प्रथम तल (पहली मंजिल) ' पंचबल यति एवं चौबीस तीर्थंकर जिन बिंब मुख्य आकर्षण: यहां अत्यंत मनमोहक मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान के साथ पंचबल यति जिन बिंब स्थित है।

मूर्तियां : यहां श्वेत पाषाण की 1008 श्री वासुपूज्य, श्री मल्लीनाथ, श्री पार्श्वनाथ, श्री नेमिनाथ और श्री महावीर स्वामी जी की मनोज्ञ प्रतिमाएं चित्रित हैं। साथ ही, दोनों ओर ऊपर की ओर मनोरम चौबीस तीर्थंकर भगवान की प्रतिमाएं सुशोभित हैं, जहां प्रतिदिन अभिषेक और शांतिधारा की शोभा होती है।

3. द्वितीय तल (दूसरी मंजिल) 'पंचमेरू एवं समवशरण'

मुख्य आकर्षण: यहां उत्तुंग और अत्यंत सुंदर 'पंचमेरू' और 'गजदंत जिनालय' स्थित हैं।

विशेष: इस तल पर 1008 श्री शीतलनाथ भगवान का प्रभावना रूप मनोरम समवशरण स्थापित है। साथ ही, यहां महान आचार्यों और भगवंतों के मंच भी रेस्तरां हैं, जो साधकों को प्राचीन परंपरा की याद दिलाते हैं।

तीर्थधाम ज्ञानोदय केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि वीतराग और विज्ञान जैन दर्शन का प्रचार-प्रसार एक जीवंत केंद्र है। यहां के प्रमुख मंदिर और मूर्तियां इस प्रकार हैं:

1. देव-शास्त्र-गुरु की आराधना।

नित्य एवं अभिषेक प्रतिदिन प्रातः भव्य जिनालय में भगवान का अभिषेक

पूजन एवं अष्टद्रव्य अर्घ्यः श्रावण द्वारा सामूहिक रूप से देव-शास्त्र-गुरु की भक्ति एवं पूजन का आयोजन किया जाता है।

2. तत्त्वज्ञान एवं स्वाध्याय (शिक्षा एवं अध्ययन)

नियमित प्रवचनः पूज्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी के टेप/सीडी प्रवचनों के माध्यम से जिन भगवान की शुद्ध वाणी का श्रवण।

विद्वान संगोष्ठियाँः समय-समय पर देश के  विभिन्न विद्वान द्वारा तत्व चर्चा, धार्मिक गोष्ठियाँ और शिविरों का आयोजन।

धार्मिक आधार पर छात्रों और बड़ों के लिए जैन सिद्धांतों पर आधारित नियमित कक्षाओं का संचालन।

3. श्री ज्ञानोदय दिगम्बर जैन सिद्धांत महाविद्यालय।

शास्त्री पाठ्यक्रम: 11वीं कक्षा से छात्रों के लिए 5 वर्ष की'शास्त्री' (बीईई) डिग्री ।

निःशुल्क शिक्षा एवं छात्रों के लिए भोजन, आवास उच्च धार्मिक एवं लौकिक शिक्षा की पूर्णतः निःशुल्क व्यवस्था।

चरित्र निर्माण: विद्यार्थियों में सदाचार, संयम और जैन धर्म के संस्कारों का बीजारोपण।

4. सात्विक आहार एवं निवास सेवा।

शुद्ध भोजनालय: 'श्री राजा श्रेयांस भोजनालय' में जल और शुद्ध सामग्री से निर्मित सात्विक भोजन।

अतिथि सेवाः यात्रियों के विश्राम के लिए सर्वसुविधा दर्शन और हॉलों की व्यवस्था, ताकि वे शांति से धर्म-ध्यान कर सकें।

ज्ञानोदय तीर्थधाम विशेष रूप से आध्यात्मिक अभ्यास और ध्यान के लिए वैश्विक वातावरण प्रस्तुत करने के लिए बनाया गया है।

1.अध्ययन और ध्यान

आचार्य श्री कुन्दकुंद स्वाध्याय भवन : जैन ग्रंथों के अध्ययन के लिए एक समाधान स्थान।

चर्चा कक्ष: चर्चाओं और विश्वासों के समाधान के लिए एक विशेष स्थान।

डिजिटल लाइब्रेरी: श्री कांजी स्वामी के प्रवचनों की ऑडियो/वीडियो लाइब्रेरी।

2. शुद्ध सात्विक जीवन

अनुशासित भोजन : जैन साबुत के शुद्ध भोजन।

रात्रि भोजन निषेध: जैन धर्म से संबंधित रात्रि भोजन का पालन।

3.आध्यात्मिक अभ्यास के लिए आध्यात्मिक अभ्यास

वासंती शाह गेस्ट हाउस: दूर-दूर से आने वाले सभी सुविधाओं से युक्त आवास के लिए।

भविष्य का आश्रम: यह उन लोगों के लिए योजनाबद्ध है जो अपना पूरा समय आध्यात्मिक साधना में समर्पित करना चाहते हैं।

4. शिक्षा और कीमत

उच्च अध्ययन: शास्त्रों के माध्यम से जैन दर्शन का गहन अध्ययन।

ईसाई धर्म का निर्देशक: आध्यात्मिक विकास में मार्गदर्शन करने वाले विद्वान विद्वानों की उपस्थिति।

5. धार्मिक आयोजन एवं शिविर

ज्ञान शिविर: सामूहिक अध्ययन और भक्ति के लिए पूरे वर्ष आयोजित किए जाते हैं।

ज्ञानोदय

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल-विदिशा मार्ग, भोपाल से 40 कि.मी. दूर स्थित यह पवित्र स्थान आध्यात्मिक शांति का केंद्र है। यह क्षेत्र परम पूज्य गुरुदेव श्री कानजी स्वामी के आध्यात्मिक सत्पुरुषार्थ एवं भगवान महावीर स्वामी के शासन को समर्पित है। यहां 150 से ज्यादा जिंनविम विराजमान हैं।

मंदिर की भव्य संरचना

भूतल: आचार्य श्री कुन्दकुन्द स्वाध्याय भवन।
प्रथम तल: मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान एवं 24 तीर्थंकर प्रतिमाएँ।
द्वितीय तल: पंचमेरु एवं गजदंत जिनालय।

सर्वसुविधा युक्त आचार्य कुन्दकुंद स्वाध्याय भवन स्थित है जहां पर प्रतिदिन स्वाध्याय, पू. गुरुदेवश्री की सी.डी. प्रवचन संचालन होता है।

अत्यंत मनमोहक भव्य मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान सहित पंचबलायति जिनालय वहां स्थित हैं श्वेत पाषाण की श्री वासुपूज्य भगवान, 1008 श्री मल्लीनाथ, श्री पार्श्वनाथ, 1008 श्री  नेमिनाथ एवं 1008 श्री श्री महावीर स्वामी 

जी की मनोज्ञ मूर्तियाँ हैं, साथ ही दोनों ओर उपरत्न की मनोरम चौपाई तीर्थंकर भगवान की मूर्तियाँ हैं। यहां नियमित रूप से अभिषेक प्रक्षाल, जिनेन्द्र पूजन, भक्ति आदि कार्यक्रम संचालित होते हैं।

भव्य 'पंचमेरू' की स्थापना

जैन भूगोल के अनुसार सुदर्शन, विजय, अचल, मंदर और विद्युतमाली—इन पांच मेरूओं का प्रतीक 'पंचमेरू' रचना यहां पर्वत अत्यंत आवेशपूर्ण रूप से निर्मित है। यह अकृत्रिम चैत्यों की वंदना का भाव जागृत करता है।

. श्री शीतलनाथ भगवान का समवसरण

मुख्य आकर्षण: यहां 1008 श्री शीतलनाथ भगवान का अतिसुंदर एवं भव्य रूप प्रतिमा स्थापित है।
महत्वपूर्ण: यह रचना भगवान की दिव्यध्वनि और उनके मोक्ष मार्ग के उपदेश की याद दिलाती है। यहां का वातावरण तत्व-चिंतन और आत्म-साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

 

जिनालय के समरूप 1008 श्री पार्श्वनाथ स्वामी के अष्ट जिनबिंब युक्त धवल संगमरमर से निर्मित मनोहारी मानस्तंभ स्थित है।

काहन शताब्दी महोत्सव कॉलम की समयरेखा